विज्ञापन

जावेद अख़्तर: पढ़ें चुनिंदा शेर

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  

मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है
किसी का भी हो सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता 


ये नया शहर तो है ख़ूब बसाया तुम ने
क्यूँ पुराना हुआ वीरान ज़रा देख तो लो 

विज्ञापन

ये ज़िंदगी भी अजब कारोबार है कि मुझे
ख़ुशी है पाने की कोई न रंज खोने का 


एक ये दिन जब लाखों ग़म और काल पड़ा है आँसू का
एक वो दिन जब एक ज़रा सी बात पे नदियाँ बहती थीं 

कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है
मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी 


नर्म अल्फ़ाज़ भली बातें मोहज़्ज़ब लहजे
पहली बारिश ही में ये रंग उतर जाते हैं 

ज़िंदगी-भर मेरे काम आए उसूल
एक इक कर के उन्हें बेचा किया


बदल जाओगे तुम ग़म सुन के मेरे
कभी दिल ग़म से घबराए तो कहना 

थीं सजी हसरतें दुकानों पर
ज़िंदगी के अजीब मेले थे 


हम तो बचपन में भी अकेले थे
सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे

4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all