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Hindi Shayari: बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                                                  महक रही है ज़मीं चाँदनी के फूलों से
ख़ुदा किसी की मोहब्बत पे मुस्कुराया है
~ बशीर बद्र

याद के चाँद दिल में उतरते रहे
चाँदनी जगमगाती रही रात भर
~ मख़दूम मुहिउद्दीन
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रात को चाँदनी तो ओढ़ा दो
दिन की चादर अभी उतारी है
~ गुलज़ार

बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की
चाँद भी ऐन चैत का उस पे तिरा जमाल भी
~ परवीन शाकिर

वो कौन था जो दिन के उजाले में खो गया 
ये चाँद किस को ढूँडने निकला है शाम से 
~ आदिल मंसूरी

चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है 
अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है 
~ फ़रहत एहसास

चाँदनी छत पे चल रही होगी
अब अकेली टहल रही होगी
~ दुष्यंत कुमार

वो चाँदनी में फिरते हैं घर घर ये शोर है
निकला है आफ़्ताब शब-ए-माहताब में
~ जलील मानिकपूरी
 

पूछा जो उन से चाँद निकलता है किस तरह
ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल के झटका दिया कि यूँ
~ आरज़ू लखनवी

बेचैन इस क़दर था कि सोया न रात भर
पलकों से लिख रहा था तिरा नाम चाँद पर
~ अज्ञात


 
एक वर्ष पहले
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