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Sawan 2025: सावन का महीना हो

रत्नेश मिश्र

Urdu Adab
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                            सावन का महीना हो
        
                                                    
                            
हर बूंद नगीना हो

क़ूफ़ा हो ज़बां उसकी
दिल मेरा मदीना हो

आवाज़ समंदर हो
और लफ़्ज़ सफ़ीना हो

मौजों के थपेड़े हों
पत्थर मिरा सीना हो

ख़्वाबों में फ़क़त आना
क्यूं उसका करीना हो

आते हो नज़र सब को
कहते हो, दफ़ीना हो

~  वज़ीर आग़ा

एक वर्ष पहले
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