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Hindi Shayari: गुलज़ार के चुनिंदा शेर

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                                                  कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़
किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा

कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की
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जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ
उस ने सदियों की जुदाई दी है

कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है
ज़िंदगी एक नज़्म लगती है

हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते

तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं
सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं

दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है
किस की आहट सुनता हूँ वीराने में

एक ही ख़्वाब ने सारी रात जगाया है
मैं ने हर करवट सोने की कोशिश की

उसी का ईमाँ बदल गया है
कभी जो मेरा ख़ुदा रहा था

ज़िंदगी पर भी कोई ज़ोर नहीं
दिल ने हर चीज़ पराई दी है

ज़ख़्म कहते हैं दिल का गहना है
दर्द दिल का लिबास होता है

यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं
सोंधी सोंधी लगती है तब माज़ी की रुस्वाई भी

चूल्हे नहीं जलाए कि बस्ती ही जल गई
कुछ रोज़ हो गए हैं अब उठता नहीं धुआँ

शाम के साए बालिश्तों से नापे हैं
चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में

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एक महीने पहले
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