विज्ञापन

क़तील शिफ़ाई की वो मशहूर ग़ज़ल जिसे पंकज उधास की आवाज़ ने अमर कर दिया

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  पंकज उधास यानी ग़ज़लों की दुनिया का वो नाम जिनकी मख़मली आवाज़ हर शमा को रोशन कर जाए। हर टूटे दिल को, तन्हा दिल को सुकून दे जाए। दिल को छू लेने वाली वो रूहानी सी आवाज़ हमेशा के लिए रुखसत हो चुकी है। पंकज उधास दुनिया को छोड़ कर जा चुके हैं लेकिन शेर, शायरी और ग़ज़लों की महफ़िल जब भी सजेगी उनकी आवाज़ के बिना मुकम्मल न हो सकेगी। 26 फरवरी 2024 को उनका निधन हुआ। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्हें अलविदा कहने से पहले जरूर सुनिए वो चंद ग़ज़लें जिसकी वजह से पंकज उधास हमेशा लोगों के अंतस ज़िंदा रहेंगे। ऐसी तमाम ग़ज़लें हैं जिन्हें पंकज की आवाज़ मिली और अमर हो गईं, प्रस्तुत है क़तील शिफ़ाई की वो मशहूर ग़ज़ल जिसे पंकज उधास की आवाज़ ने अम कर दिया- 

चाँदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल 
इक तू ही धनवान है गोरी बाक़ी सब कंगाल 

हर आँगन में आए तेरे उजले रूप की धूप 
छैल-छबेली रानी थोड़ा घुँघट और निकाल 

भर भर नज़रें देखें तुझ को आते-जाते लोग 
देख तुझे बदनाम न कर दे ये हिरनी सी चाल 

कितनी सुंदर नार हो कोई मैं आवाज़ न दूँ 
तुझ सा जिस का नाम नहीं है वो जी का जंजाल 

सामने तू आए तो धड़कें मिल कर लाखों दिल 
अब जाना धरती पर कैसे आते हैं भौंचाल 
विज्ञापन

बीच में रंग-महल है तेरा खाई चारों ओर 
हम से मिलने की अब गोरी तू ही राह निकाल 

कर सकते हैं चाह तिरी अब 'सरमद' या 'मंसूर' 
मिले किसी को दार यहाँ और खिंचे किसी की खाल 

ये दुनिया है ख़ुद-ग़रज़ों की लेकिन यार 'क़तील' 
तू ने हमारा साथ दिया तो जिए हज़ारों साल 


2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile