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Urdu Ghazal: आग़ा बिस्मिल की मक़बूल ग़ज़ल 'महफ़िल में बार-बार किसी पर नज़र गई'

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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महफ़िल में बार-बार किसी पर नज़र गई


हमने बचाई लाख मगर फिर उधर गई

उनकी नज़र में कोई तो जादू ज़रूर है
जिस पर पड़ी उसी के जिगर तक उतर गई 

उस बेवफा की आंख से आंसू छलक पड़े
हसरत भरी निगाह बड़ा काम कर गई

उनके जमाल-ए-रुख़ पे उन्हीं का जमाल था
वो चल दिए तो रौनक-ए-शाम-ओ-सहर हुई
3 वर्ष पहले
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