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आज का शब्द: दीपक और हरिवंशराय बच्चन की कविता- मेरा जलना ही तो मेरा मुस्काना है 

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                                                  अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- दीपक, जिसका अर्थ है- दीया या चिराग। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता- मेरा जलना ही तो मेरा मुस्काना है 


मैं दीपक हूँ, मेरा जलना ही तो मेरा मुस्काना है

आभारी हूँ तुमने आकर
मेरा ताप-भरा तन देखा,
आभारी हूँ तुमने आकर
मेरा आह-घिरा मन देखा,
करुणामय वह शब्द तुम्हारा--
’मुसकाओ’ था कितना प्यारा।
मैं दीपक हूँ, मेरा जलना ही तो मेरा मुस्काना है|
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है मुझको मालूम पुतलियों
में दीपों की लौ लहराती,
है मुझको मालूम कि अधरों
के ऊपर जगती है बाती,
उजियाला कर देने वाली
मुसकानों से भी परिचित हूँ,
पर मैंने तम की बाहों में अपना साथी पहचाना है
मैं दीपक हूँ, मेरा जलना ही तो मेरा मुस्काना है|
4 वर्ष पहले
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