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आज का विचार: रामधारी सिंह दिनकर

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                            परंपरा और विद्रोह, जीवन में दोनों का स्थान है। परंपरा घेरा डालकर पानी को गहरा बनाती है। विद्रोह घेरों को तोड़कर पानी को चोड़ाई में ले जाता है। परंपरा रोकती है, विद्रोह आगे बढ़ना चाहता है। इस संघर्ष के बाद जो प्रगति होती है, वही समाज की असली प्रगति है।
        
                                                    
                            

~ रामधारी सिंह दिनकर

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