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आज का शब्द: विधु और अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की कविता 'वर वनिता'

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है - विधु जिसका अर्थ है 1. चंद्रमा 2. कपूर 3. ब्रह्मा। कवि अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 



वर वनिता है नहीं अति कलित कुंतल वाली।
भुवन-मोहिनी-काम-कामिनी-कर-प्रतिपाली।
विधु-वदनी, रसभरी, सरस, सरहोरुह-नयनी।
अमल अमोल कपोलवती कल कोकिल-बयनी।
उत्तम कुल की वधू उच्च कुल-संभव-बाला।
गौरव गरिमावती विविध गुण गण मणिमाला।
हाव भाव विभ्रम विलास अनुपम पुत्तलिका।
रुचिर हास परिहास कुसुमकुल विकसित कलिका।
सुंदर बसना बनी ठनी मधुमयी फबीली।
भाग भरी औ राग-रंग अनुराग-रँगीली।
अलंकार-आलोक-समालोकित मुद-मूला।
नीति-रता संयता बहुविकचता अनुकूला।
है वह वर वनिता जो रहे, जन्मभूमि-हित में निरत।
हो जिसका जन-हित जाति-हित, जग-हित परम पुनीत व्रत॥
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6 महीने पहले
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