'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- स्थूल, जिसका अर्थ है- मोटा, बिना परिश्रम के समझ में आनेवाला। प्रस्तुत है अज्ञेय की कविता- मैं तुम्हें सम्पूर्णत: जान गया हूँ
मैं तुम्हें सम्पूर्णत: जान गया हूँ।
तुम क्षितिज की सन्धि-रेखा के आकाश हो, और मैं वहीं की पृथ्वी।
हम दोनों अभिन्न हैं, तथापि हमारे स्थूल आकार अलग-अलग हैं;
हम दोनों ही सात्त्विक हैं, पर हमारा अस्तित्व नहीं है;
हम दोनों के प्रस्तार सीमित हैं,
फिर भी हमारा मिलन अनन्त और अखंड है।
मैं तुम्हें सम्पूर्णत: जान गया हूँ।
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