विज्ञापन

आज का शब्द: शाद्वल और सुमित्रानंदन पंत की कविता 'आंगन से'

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            

हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है शाद्वल जिसका अर्थ है - हरी घास से ढंका हुआ; हरा-भरा। कवि सुमित्रानंदन पंत ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 



रोमांचित हो उठे आज नव वर्षा के स्पर्शों से?
छोटे से आंगन मेरे, तुम रीते थे वर्षों से!
नव दूर्वा के हरे प्ररोहों से अब भरे मनोहर
मरकत के टुकड़े से लगते तुम विजड़ित भू उर पर!

जन निवास से दूर, नीड़ में वन तरुओं के छिपकर,
भू उरोज-से उभरे इस एकांत मौन भीटे पर
कोमल शाद्वल अंचल पर लेटा मैं स्मित चिन्तापर,
जीवन की हंसमुख हरीतिमा को देखूं आंखें भर!

एक ओर गहरी खाई में सोया तरुओं का तम
केका रव से चकित, बखेरे सुख स्वप्नों का संभ्रम!
और दूसरी ओर मंजरित आम्र विपिन कर मुखरित
मधु में पिक, पावस में पी-खग करे हृदय को हर्षित!

हरित भरित वन नीम उच्छ्वसित शाखाओं पर विह्वल
वक्षभार, हां, रहे झुकाए मेरे ऊपर कोमल! 
 
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

User

26 कविताएं

View Profile

Sudhir Khatri

562 कविताएं

View Profile