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आज का शब्द: निश्छल और जयशंकर प्रसाद की रचना- मेरे नाविक! धीरे-धीरे

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                                                  'निश्छल' का अर्थ होता है- छल- कपट से रहित, सरल प्रकृति का या सीधा। अमर उजाला  'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखा में आज का शब्द है- निश्छल। प्रस्तुत है जयशंकर प्रसाद की कविता: ले चल वहाँ भुलावा देकर

ले चल वहाँ भुलावा देकर, मेरे नाविक! धीरे-धीरे। 

जिस निर्जन में सागर लहरी, अंबर के कानों में गहरी— 
निश्छल प्रेम-कथा कहती हो, तज कोलाहल की अवनी रे ! 

जहाँ साँझ-सी जीवन-छाया ढीले अपनी कोमल काया, 
नील नयन से ढुलकाती हो, ताराओं की पाँति घनी रे !
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जिस गंभीर मधुर छाया में—विश्व चित्र-पट चल माया में— 
विभुता विभु-सी पड़े दिखाई दुख-सुख वाली, सत्य बनी रे! 

श्रम-विश्राम क्षितिज बेला से—जहाँ सृजन करते मेला से, 
अमर जागरण उषा नयन से—बिखराती हो ज्योति घनी रे
3 वर्ष पहले
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Anil Pandey

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