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आज का शब्द: झुमका और संजय अलंग की कविता- स्थाई सन्नाटे में पसरे मेरे कस्बे में शोर मच गया

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                                                  'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- झुमका, जिसका अर्थ है- कान में पहनने का एक प्रसिद्ध गहना। प्रस्तुत है संजय अलंग की कविता- स्थाई सन्नाटे में पसरे मेरे कस्बे में शोर मच गया

अल्हड़ गदराई युवती सा बहता
अलमस्त बरसाती नाला है-झुमका
 
लगा बनने उस पर बाँध
स्थाई सन्नाटे में पसरे
मेरे कस्बे में शोर मच गया
कस्बे से से झुंड के झुंड उसे देखने जाने लगे
इंजीनियर, ठेकेदारों की फ़ौज़ आने लगी 

कस्बे का व्यापार बढ़ निकला 
बातों का भी 
नए-नए लोग आए 
लोगों को शगल मिला 
बेरोज़गारों को काम 
व्यापारियों को दाम 
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कस्बा फैलने लगा
नगर बनने लगा 
शराब आई 
चाकू आया 
गुंडे आए 

लोग फुटबाल भूले
रामलीला भूली 
क्रिकेट आया, कालेज़ आया

विडियो पार्लर खुले 
कस्बा सम्पन्न दिखने लगा
कुछ वर्ष चहल-पहल रही

बाँध पूर्ण हुआ
इंजीनियर गए, ठेकेदार गए
पैसा गया, फुटबाल गई

शराब रह गई 
ढ़ाबे रह गए 
बेरोज़गारी रह गई 

झुमका पर राजा का नाम चढ़ा
कस्बा चीज़ों का आदी हो गया 
सरकार काम देने की नहीं 
3 वर्ष पहले
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