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आज का शब्द: आसव और महादेवी वर्मा की कविता 'स्वप्न'

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है आसव जिसका अर्थ है 1.रस 2.अर्क 3.मदिरा। कवयित्री महादेवी वर्मा ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 



इन हीरक से तारों को
कर चूर बनाया प्याला,
पीड़ा का सार मिलाकर
प्राणों का आसव ढाला।

मलयानिल के झोंको से
अपना उपहार लपेटे,
मैं सूने तट पर आयी
बिखरे उद्गार समेटे।

काले रजनी अंचल में
लिपटीं लहरें सोती थीं,
मधु मानस का बरसाती
वारिदमाला रोती थी।

नीरव तम की छाया में
छिप सौरभ की अलकों में,
गायक वह गान तुम्हारा 
आ मंड़राया पलकों में! 
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