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Kargil Vijay Diwas 2024: है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय

कुमार ललित

Sahitya
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                                                  है नमन उनको कि जो इस देह को अमरत्व देकर
इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गए हैं
है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय 
जो धरा पर गिर पड़े पर आसमानी हो गए हैं 

है नमन उनको कि जिनको मृत्यु पाकर हुई पावन 
शिखर जिनके चरण छूकर और मानी हो गए हैं 
है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय 
जो धरा पर गिर पड़े पर आसमानी हो गए हैं.. 


       वर्ष 1999 में पाकिस्तानी सेना के साथ हुए कारगिल युद्ध में जब एक भारतीय वीर सैनिक का शव तिरंगे में लिपट कर आया तो  शौर्य, बलिदान, श्रद्धा और आँसुओं के सैलाब को प्रत्यक्ष देखकर लोकप्रिय कवि डॉ. कुमार विश्वास ख़ुद को रोक नहीं सके और उनकी कलम ने ये कालजयी गीत रच दिया। 

        आज 26 जुलाई, 2024 को जब पूरा देश कारगिल विजय दिवस की रजत जयंती मना रहा है, तब भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए यह गीत बरबस होंठों पर आ जाता है।

     वर्ष 1999 में आज ही के दिन भारत के रणबाँकुरों ने कश्मीरी उग्रवादियों के रूप में छिप कर आए पाकिस्तानी सैनिकों (घुसपैठियों) को पूरी तरह विफल, पराजित और भारतीय सीमा रेखा के बाहर खदेड़ दिया था। 
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हमारा देश तो पड़ोसी देश के साथ सद्भावना का वातावरण बनाने में जुटा था लेकिन पड़ोसी देश अपने नापाक इरादों के साथ हमारी नियंत्रण रेखा को पार कर रहा था। ऐसे में जहाँ तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने भारतीय सेना को युद्ध करने का आदेश दिया, वहीं जाने माने कवि हरिओम पवार ने भी अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए दो टूक कह दिया:- 

दुश्मन ने विश्वासघात का छुरा पीठ में गाड़ दिया 
शिमला समझौते में खींचे मानचित्र को फाड़ दिया 
बारूदी अंगारे लेकर सीमा-रेखा लाँघ चुका 
कस्मे-वादे, प्यार-मोहब्बत सब खूँटी पर टाँग चुका 
तो तुम भी घातों का निर्णय एक बार हो जाने दो 
एक युद्ध सीमा-रेखा के आर पार हो जाने दो..


दुनिया के सबसे मुश्किल रणक्षेत्र में दो महीने से भी अधिक चले इस कारगिल युद्ध में अपने असाधारण शौर्य का प्रदर्शन करते हुए भारत के 527 वीर जवान शहीद हुए और लगभग 1400 सैनिक घायल हुए थे।

लाखों भारतीयों में देशभक्ति का ज्वार जगाने वाले सुप्रसिद्ध कवि विनीत चौहान ने "घायल सैनिक का पत्र अपने परिवार के नाम" कविता द्वारा भारतीय सैनिकों के जज्बे को जिस घनीभूत संवेदना के साथ सजीव किया है, वह बेहद मर्मस्पर्शी है। 

माँ तुम्हारा लाड़ला रण में अभी घायल हुआ है
 देख उसकी वीरता को शत्रु भी कायल हुआ है 

रक्त की होली रचाकर प्रलयंकारी दिख रहा हूँ
 माँ उसी शोणित से तुमको पत्र अंतिम लिख रहा हूँ


आज का दिन उन जियालों, मतवालों और भारत माँ के सच्चे लालों का है जिन्होंने अपनी जननी जन्मभूमि की आन, मान, शान के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया लेकिन दुश्मन के नापाक इरादों पर पानी फेर दिया और दुश्मन का लहू कारगिल की हर चोटी पर बिखेर दिया। 

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि- गीतकार और उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के पूर्व कार्यकारी उपाध्यक्ष सोम ठाकुर ने माँ भारती के इन सच्चे सपूतों का कुछ इस तरह अभिनंदन किया:-

तुम समय के शंख पर जयघोष के उजले प्रहर हो 
काटती है रात को जो उस किरण के वंशधर हो..


भारतीय वीरता और साहस की यह अनुपम गाथा यूँ ही दोहराई जाती रहेगी। श्रद्धा के दीप सदैव जलते रहेंगे। वीरों के सम्मान में काव्य-सुमन इसी तरह खिलते रहेंगे। 

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