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जब नौशाद ने दी लता को हिम्मत और ग़ज़ल मुकम्मल हो गई

काव्य डेस्क

Sahitya
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                            नौशाद: जर्रा जो आफताब बना नामक किताब में चौधरी जिया इमाम ने नौशाद के जीवन के संस्मरणों को बेहतर ढंग से पेश किया है। इन्हीं संस्मरणों में एक वाकया बहुत बेहतर है। जिसमें लता ने नौशाद की हिम्मत के साथ एक गीत गाया और वह मुकम्मल हो गया। 
        
                                                    
                            

1948 में लता मंगेशकर जी फिल्म 'मजबूर' के लिए 'दिल मेरा तोड़ा, मुझे कहीं का न छोड़ा तेरे प्यार ने' गीत की रिकार्डिंग कर रही थी। उस दौरान वहां गुलाम हैदर साहब और अनिल बिस्वास के साथ नौशाद साहब भी मौजूद थे। बाद में नौशाद साहब के संगीत निर्देशन में लता मंगेशकर ने बहुत सारे गीत गाए। लता जी ने नौशाद साहब के निर्देशन में 144 गीत गाए, जिनमें 36 युगल गीत हैं। इनमें 22 गीत मोहम्मद रफी के साथ तथा 8 गीत शमशाद बेगम के साथ, एक-एक मुकेश तथा हेमंत कुमार के साथ और दो आशा भोंसले के साथ गाए। 

मदर इंडिया के गीत 'दुनिया में हम आए हैं तो जीना ही पड़ेगा' में नौशाद साहब ने उषा, मीना और लता को एक साथ गवाया। रफीक गजनवी अच्छे मौसीकार और बेहतरीन गायक थे। इन्होंने फिल्म 'चल चल रे नौजवान' में एक पियानो गीत गुलाम हैदर के संगीत निर्देशन में गाया था। बोल थे 'आया तूफ़ान आज आया तूफ़ान' जो कि चित्रपट पर प्रस्तुत भी किया गया। 

उन्हीं दिनों की बात है नौशाद साहब जोहराबाई अंबाले वाली के घर में बैठे थे कि ग़ुलाम हैदर एचएमवी का एक सेंपल रिकार्ड लेकर आ गए और जोहराबाई से कहा कि यह रिकार्ड अपने ग्रामोफोन पर बजाओ, इसमें एक बच्ची से गवाया है, देखो कैसी आवाज़ है इसकी,  गाना सुना गया तो जोहराबाई ने कहा कि बहुत छोटी बच्ची मालूम होती है। गुलाम साहब ने जवाब दिया, 'जी हां बहुत छोटी बच्ची है और महाराष्ट्र की रहने वाली है।' यह बच्ची लता मंगेशकर थी और यह उनका पहला हिंदी गीत था। 

नौशाद साहब फिल्म अंदाज की एक गज़ल 'उठाए जा उनके सितम की' रिकार्डिंग करवाने वाले थे। उन्होंने इसके लिए लता मंगेशकर को दस-बारह रोज़ रिहर्सल करवाई थी। रिकार्डिंग के दिन महबूब साहब ने फिल्म सितारों-दिलीप कुमार, नरगिस, राज जी वगैरह को रिकार्डिंग रुम में बुलाया। खुद महबूब साहब भी अपनी बेगम सरदार अख़्तर के साथ मौजूद थे। इन सबको इसलिए बुलाया गया कि महबूब साहब पहली बार एक महाराष्ट्रीयन लड़की को गाना गवा रहे थे। 

लता जी उस रोज़ काफ़ी घबराई हुईं थीं लेकिन नौशाद साहब ने उन्हें काफ़ी हिम्मत दी। उनको घंटों रियाज़ करवाया। यह भी कहा कि बस तुम गाते रहना, यह मत सोचना कि तुम्हारा गाना इतने बड़े आर्टिस्ट सुन रहे हैं। नौशाद ने कहा कि कमाल यह होना चाहिए कि पहला ही टेक ओके हो। लता ने उनके मशवरे पर अमल किया और बेखौफ़ होकर गज़ल गाई। सबने गजल को पसंद किया। 
 
(नौशाद: जर्रा जो आफताब बना नामक किताब का अंश) 
4 वर्ष पहले
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