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फ़रह़त कानपुरी जो असहयोग आंदोलन मेें 6 महीने जेल में रहे...

काव्य डेस्क

Mud Mud Ke Dekhta Hu
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श्रीगंगाधरनाथ ‘फ़रह़त’ का जन्म 1905 ई. में कानपुर के एक प्रतिष्ठित कायस्थ परिवार में हुआ था। वकालत-पेशा इनके परिवार में साल पुश्त से चला आ रहा है।

1930 ई, में इन्होंने बी.ए. किया और उसी वर्ष असहयोग आंदोलन में छ: मास को जेल गए। जेल जाते समय फ़रह़त साहब नगर कांग्रेस कमेटी कानपुर के प्रधानमंत्री थे। जेल में इनका स्वास्थ्य खराब हो गया था। 1933 में इन्होंने कानपुर से वकालत आरम्भ की और अल्पकाल में ही नगर के प्रसिद्ध वकीलों में गणना होने लगी। शायरी की ओर इनकी रुचि किशोरावस्था से ही थी। वह रूबाई, ग़ज़ल, क़िते आदि कहने में बहुत अच्छा अभ्यास रखते थे। उर्दू-फ़ारसी के विद्वान थे। भारत के प्रसिद्ध पत्रों में इनकी कलाम छपता था।

इनका कहना था कि-



हर हाल में ख़ुश रहना, ख़ुश रहके अलम सहना
एक चीज़ ज़माने में ‘फ़रह़त’ की भी हस्ती है

इनका 46 बर्ष की आयु में स्वर्गवास हो गया और जब इनके निधन की ख़बर जिगर मुरादाबादी को लगी तो उन्होंने फ़रमाया-



दुनिया से एक इन्सान उठ गया

सचमुच फ़रहत एक ऐसे नेक इन्सान थे।



साभार- शेर ओ सुखन 
गोयलीय
8 वर्ष पहले
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