दिलीप कुमार और मीना कुमारी अभिनीत फिल्म यहूदी का गीत ये मेरा दीवानापन है...इश्क के इंकलाब को दर्शाता है। इसमें आशिक के विश्वास को सुनहरे शब्दों से व्यक्त किया गया है। प्रसिद्ध शायर शहरयार ने इस गीत को लिखकर एक तरह से इश्क का रोबीला अंदाज दर्शकों को परोसा था। शंकर-जयकिशन का जादुई संगीत और मुकेश की कर्णप्रिय आवाज में यह गीत प्रेमियों के लिए एक तरह की क्रांति है। प्रेम के पथ पर चल रहे आशिकों के लिए यह गीत अपनी कमजोरियों से यह एक तरह की बगावत है। मोहब्बत का सजीला और संजीदा विश्वास है। आशिक की चमकती आंखों का लंबा एहसास है जो इश्क में डूबे हुए किसी व्यक्ति को ही दिखाई पड़ेगा।
दिल से तुझको बेदिली है, मुझको है दिल का गुरूर...
1958 में रिलीज इस फिल्म का यह गीत आज प्रेम में अकेले पड़ चुके आशिकों को ढेर सारी हिम्मत देता है। करीब 60 साल बाद भी प्रेम का गुलदस्ता तरो ताजा रखने वाले इस गीत की पहली पंक्ति में ही आशिक बड़े विश्वास से कहता है...
दिल से तुझको बेदिली है, मुझको है दिल का गुरूर
तू ये माने के न माने, लोग मानेंगे ज़ुरूर
प्रेम में विश्वास ही फलीभूत होता है...
प्रेम में विश्वास ही फलीभूत होता है। दो अनजान लोग प्रेम पथ में चलते हुए आपस का विश्वास मजबूत बनाए रखें तो पूरी कायनात एक दिन उनके हसीन संकल्प के आगे झुक जाती है। लोगों को अपने प्रेम के आगे झुकाने के लिए लेकिन सबसे पहले आदमी में नैतिक हिम्मत और विश्वास का होना बहुत जरूरी है। ऐसी हिम्मत सच्चाई और ईमानदारी के तले ही बड़ी होगी। मोहब्बत की सफलता के लिए सबसे पहली शर्त है मन से पाक साफ होना। अगर आप साफ है तो विश्वास के साथ अपने दिल के गुरूर को व्यक्त कर सकेंगे। आशिक के सच्चे विश्वास को जाहिर करने वाला यह गीत मुझे काफी पसंद है।
ये मेरा दीवानापन है, या मुहब्बत का सुरूर...
ये मेरा दीवानापन है, या मुहब्बत का सुरूर
तू न पहचाने तो है ये, तेरी नज़रों का क़ुसूर
ये मेरा दीवानापन है ...
प्रेमी कहता है मेरा दीवानेपन या मेरे मुहब्बत के सुरूर को तुम तब पहचान पाओगी जब तुम सच्चे दिल से प्रेम करने के लिए अपने आपको राजी कर लोगी। गीत के ये बोल बता रहें हैं कि इश्क में परेशानी दूसरे से नहीं बल्कि अपनी कमजोरियों से होती है। आशिक कहता है तुम अगर मेरे अलफाज नहीं पहचान पा रही हो इसमें मेरा नहीं बल्कि तुम्हारा कुसूर है।
दीवाना आशिक कहता है ये दिल तुम्हारे साथ आस बांध चुका है...
दिल को तेरी ही तमन्ना, दिल को है तुझसे ही प्यार
चाहे तू आए न आए, हम करेंगे इंतज़ार
ये मेरा दीवानापन है ...
गीत के अंतरे में दीवाना आशिक कहता है ये दिल तुम्हारे साथ आस बांध चुका है। आशिक जो कह रहा है उसका सार है कि दिल की दुनिया कोई बाजार नहीं है। जो रंग बदलने के साथ बदल जाए। यह तो अपने आप से किया गया करार है। यह खुद से लिया गया संकल्प है कि मुझे प्रेम का सच्चा पथिक बनना है। इस संकल्प में लंबी तन्हाई है। विरोध है। जब हंसाई है। वह कह रहा है चाहे तू आए न आए, हम करेंगे इंतजार...गीत के यह बोल ही मुझे बेहद अजीज लगते हैं।
ऐसे वीराने में इक दिन, घुट के मर जाएंगे हम...
ऐसे वीराने में इक दिन, घुट के मर जाएंगे हम
जितना जी चाहे पुकारो, फिर नहीं आएंगे हम
ये मेरा दीवानापन है ...
अंतिम अंतरे में आशिक कह रहा है कि मुझे मालूम है कि प्रेम की राहों में वीराने भी मिलते हैं। घुटन होती है। लेकिन इसके बाद भी मुझे अपने साथी का सुनहरा साथ चाहिए। मैं इसी साथ की चाह में मरने को भी तैयार हूं। एक आशिक का इश्क के लिए ऐसा सच्चानामा बहुत कम गीतों में होगा।
5 वर्ष पहले