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तुझे देखा तो ये जाना सनम… प्यार होता है दीवाना सनम

काव्य डेस्क

Mere Azeez Filmi Nagme
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जब दिल पर मुहब्बत की दस्तक होती है तो हर समां सुहाना लगने लगता है और ये दस्तक यूं ही नहीं होती लाखों की भीड़ में कोई ऐसी सूरत नज़र आ जाती है जिसे देखकर ज़हन को इश़्क की तमाम परिभाषाएं समझ आ जाती हैं। वो सूरत अपनी गली में भी दिखाई दे सकती है, अपने शहर में भी और परदेस में भी। हो सकता है वो किसी ट्रेन में नज़र आ जाए या किसी बस अड्डे पर बस का इंतज़ार करते हुए उसका दीदार हो जाए।

कुछ ऐसा ही हुआ राज के साथ जिसे अपने ही देश की सिमरन से विदेश की धरती पर प्यार हुआ। ये हसीन हादसा हुआ था 90 के दशक में आयी फ़िल्म ‘दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में जिसमें ये किरदार शाहरुख ख़ान और काजोल ने निभाए थे। उस दशक के लोगों से लेकर आज तक के युवाओं के बीच वह फ़िल्म खासी मशहूर है और उसका कारण है इसकी विषय वस्तु जो प्रेम पर आधारित है और प्रेम हर समय-काल से मुक्त और हर युग में प्रासंगिक है इसलिए यह फ़िल्म आज भी मक़बूल है।

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तुझे देखा तो ये जाना सनम...

जिस उत्साह के साथ दर्शकों ने इस फ़िल्म को देखा उतना ही डूबकर इसके गानों को भी गाया, इसी फ़िल्म का एक गाना है तुझे देखा तो ये जाना सनम। इस कथन में कोई दोराय नहीं है कि, यह सिर्फ़ मेरा ही नहीं बल्कि हर उस इंसान का पसंदीदा नग़्मा होगा जिसने एक बार भी यह फ़िल्म देखी है। आनंद बख्शी ने हमेशा की तरह इसमें अपने कलम के जादू का कमाल दिखाया है। मसलन इश्क़ में लोग दीवाने हो जाते हैं और साथ जीने-मरने की कसम खाते हैं, इसी बात को आनंद बख्शी ने कुछ यूं कहा है कि,

तुझे देखा तो ये जाना सनम
प्यार होता है दीवाना सनम
अब यहाँ से कहाँ जाएं हम
तेरी बाहों में मर जाएं हम

इस गाने को सुनने के 4 घंटे बाद तक भी अगर इसकी धुन आपके दिमाग में है और आप इसे गुनगुना रहे हैं तो इसका श्रेय जाता है जतिन-ललित के संगीत को जिसने इस गाने में ऐसी ताल बांधी है कि आपका रोम खुद-ब-खुद खिल उठेगा। उस पर कुमार सानू और लता मंगेशकर की आवाज़ कानों से सीधे दिल में उतरती हुई महसूस होती है।

आँखें मेरी, सपने तेरे...

जब आप प्रेम में होते हैं तो आत्मिक रूप से एक हो जाते हैं और जब दो जिस्म आत्मा से ही एक हो जाएं तो उनके बीच भौतिक वस्तुओं की कोई अहमियत नहीं रह जाती। खूबसूरत पहाड़ी जगह पर सिमरन और राज भी अपने जज़्बातों को कुछ यूं ही बयां कर रहे हैं।

आँखें मेरी, सपने तेरे
दिल मेरा, यादें तेरी
मेरा है क्या, सब कुछ तेरा
जान तेरी, साँसें तेरी
मेरी आँखों में आँसू तेरे आ गए
मुस्कुराने लगे सारे ग़म
तुझे देखा तो ये जाना सनम…

प्रेम का जाम पीकर मदहोश हुए दो प्रेमी अपनी एक अलग दुनिया बसा लेते हैं और उसी में जीने लगते हैं, जहां न समाज का डर और न ही कोई बंधन आपको मजबूर कर सकता है। तब आप सिर्फ़ महबूब के ग़म से दुखी होते हो और उसकी ख़ुशी से ख़ुश होते हो।

ये दिल कहीं, लगता नहीं...

अगर प्रेमी एक आवाज़ दे तो सारे जमाने की जंज़ीर को तोड़कर मोहब्बत दौड़ी चली आती है क्योंकि ये वो अहसास है जिसकी ऊड़ान भौतिक दुनिया की पकड़ से बहुत ऊंची है और प्रेमी उसे बार-बार आवाज़ देता है क्यूंकि अपनी महबूबा के बिना उसका कहीं दिल नहीं लगता,वो चाहता है कि वह सामने बैठी रहे और वह उसे अनिमोष ही तकता रहे। यही इस गीत के नायक और नायिका भी कह रहे हैं।

ये दिल कहीं, लगता नहीं
क्या कहूँ, मैं क्या करूँ
हाँ, तू सामने, बैठी रहे
मैं तुझे देखा करूँ
तू ने आवाज़ दी देख मैं आ गई
प्यार से है बड़ी क्या कसम
तुझे देखा तो ये जाना सनम


8 वर्ष पहले
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Sanjai kumar

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