शायरों ने माँ पर कलाम लिखे, चित्रकारों ने चित्र बनाए और संगीतकारों ने धुनें बनाईं और जब उनसे शब्द मिले जिन्हें गायकों ने गुनगुना दिया तो बेहद भावुक गीत बने। इसलिए बॉलीवुड में माँ पर कई गीत बनाए गए हैं।
तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है
प्यारी-प्यारी है ओ माँ, ओ माँ
ये जो दुनिया है ये बन है काँटों का
तू फुलवारी है ओ माँ, ओ माँ
दूखन लागी है माँ तेरी अँखियाँ
मेरे लिए जागी है तू सारी-सारी रतियाँ
मेरी निंदिया पे, अपनी निंदिया भी, तूने वारी है
ओ माँ, ओ माँ
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मैं कभी बतलाता नहीं
पर अंधेरे से डरता हूँ मैं माँ
यूँ तो मैं, दिखलाता नहीं
तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ
तुझे सब है पता, है ना माँ
तुझे सब है पता, मेरी माँ
भीड़ में, यूँ ना छोड़ो मुझे
घर लौट के भी आ ना पाऊँ माँ
भेज ना इतना दूर मुझको तू
याद भी तुझको आ ना पाऊँ माँ
क्या इतना बुरा हूँ मैं माँ
क्या इतना बुरा मेरी माँ
ऊँगली पकड़ के फिर से सिखा दे
गोदी उठा लेना माँ
आँचल से मेरी मुँह पोंछ देना
मैला-सा लागे जहां
आँखें दिखाए मुझे जब ज़िन्दगी
याद मुझे आती है तेरे गुस्से की
डाँटा भी तो तूने मुझे फूलों की तरह
क्यूँ नहीं माँ सारी दुनिया तेरी तरह
माथा गरम है सुबह से मेरा
रख दे हथेली ना माँ
तूने कुछ खाया, देर से क्यूँ आई
कोई ना पूछे यहाँ
ओ माँ माँ माँ
मेरी दुनिय है माँ तेरे आंचल में
शीतल छाया तू दुख के जंगल में
मेरी दुनिया है माँ तेरे आंचल में
ओ मेरी राहों के दीप
तेरी दो अँखियां
ओ मुझे गीत से कहीं
तेरी जो बतियाँ
युग में मिलता
युग में मिलता है, सो मिला पल में
मेरी दुनिया है माँ तेरे आंचल में