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अपने दिलबर से पहली मुलाक़ात की बेताबी को बयां करता ये फिल्मी नग़मा

काव्य डेस्क

Mere Azeez Filmi Nagme
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                                                  अपनी दिलकश आवाज़ से कानों में रस घोलने वाले सदाबहार गायक किशोर कुमार अपने चुलबुले अंदाज़ के लिए भी मशहूर थे। प्रेमी को पहला प्यार और पहले प्यार की पहली मुलाक़ात हमेशा याद रहती है। ऐसी मुलाक़ात जब हम अपने किसी ख़ास से मिलने के लिए बेताब होते हैं। हर दिन मिलने के दिन गिनते रहते हैं। किशोर कुमार का ये गाना कुछ उन्हीं लम्हों की याद दिलाता है। 1971 में आयी फ़िल्म 'पराया धन' के इस गाने को लिखा है आनंद बक्षी ने लिखा है। इस गाने उस पहली मुलाक़ात को और भी खुबसूरत बनाया जब कोई शख़्स अपने चाहने वाले से मिलने के लिए बेताब रहता है। 

आज उनसे पहली मुलाक़ात होगी, 
फिर आमने सामने बात होगी 
फिर होगा क्या, क्या पता क्या ख़बर


जब हम किसी ऐसे इंसान से पहली बार मिलते हैं जिसके लिए हमारे मन में कुछ ख़ास एहसास होते हैं और हम उस साथ कुछ पल बीताना चाहते हैं तो कुछ इस तरह के ख़्यालों में ही डूबे रहते हैं कि जब हम पहली बार अपने अज़ीज से मिलेंगा तो कैसा होगा वो लम्हा..? कैसी होगी वो मुलाक़ात जब वो शख़्स मेरे सामने बैठकर मुझसे प्यार भरी बातें करेगा..? कुछ इस तरह के सवाल हमेशा दिल और दिमाग में आते-जाते रहते हैं। 
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अनदेखा अंजाना मुखड़ा कैसा होगा   
ना जाने वो चाँद का टुकड़ा कैसा होगा
मिलते ही उनसे हाय दिल में, 
एक बेक़रारी सी दिन रात होगी 
फिर होगा क्या...


'अनदेखा अंजाना मुखड़ा कैसा होगा'... जी हां दोस्तों वो बस लफ़्ज़ों में कहने के लिए अंजान होता, मगर असल में वो कब हमारे दिल के क़रीब हो जाता है इसकी ख़बर हमें भी नहीं होती है। लेकिन जब मुलाक़ात का मौक़ा आता है तो दिल में ये ख़्याल ज़रूर आता है कि कैसा होगा मेरा वो अज़ीज जो बिना बताये मेरे दिल के इतने क़रीब आ गया। और फिर एक पल के लिए ऐसे भी सवाल आते हैं कि अपने अज़ीज से मिलने के बाद क्या होगा..? लेकिन एक बात तो तय है कि दिल में फिर चैन नहीं  होगा और एक बेक़रारी सी छाई रहेगी, जो रातों की नींदें भी उड़ा ले जाएगा। पहली मुलाक़ात के ये सवाल हमें गुदगुदा रहते हैं। 
 

बैठे होंगे रास्ते पे वो आँखें बिछाये 
हर आहट पे सोचते होंगे, साजन आये 
क्या हाल होगा, वहाँ कुछ ना पूछो 
दिल में उमंगों कि बरात होगी 
फिर होगा क्या...


जब पहली मुलाक़ात हो ऐसे में इंतजार का ज़िक्र किए बिना बात अधूरी रह जाएगी। जब हमें पता चलता है कि कोई ख़ास हमारे इतंज़ार में बैठा होगा। हमारे इंतज़ार में उसकी आंखें भी थक गई होंगी। और हर एक छोटी आहट भी हमारे आने का उसका एहसास करा रही होगी। तो सच माने वो लम्हा भी बेहद ख़ूबसूरत लगता। हमारा अज़ीज़ इतंज़ार में आंखे तो बिछाये होगा ही साथ में दिल में मिलने के अरमान और खुशी उसके इंतज़ार को दिलासा भी दे रही होगी थोड़े और इंतज़ार करने के लिए।
 

खुलके होंगी तन्हाई में दिल की बातें
प्यासे तनमन पे होंगी रिम-झिम बरसातें 
ऐ मेरे दिल ये भी तो सोच ले तू 
कोई सहेली अगर साथ होगी 
फिर होगा क्या...  


जब आप अपने किसी अज़ीज़ से मिलते हो या फिर मिलने जाते हो तो एक ऐसी एकांत जगह ढूंढ रहे होते हो जहां बैठकर अपने दिल की सारी बातें बड़े ही आराम से कह सको। ऐसा करने के बाद दिल को बड़ा सुकून मिलता है। मगर इन सभी अरमानों पर पानी फिर जाता है जब आपका अज़ीज़ अपने किसी दोस्त को साथ ले आए और आपकी वो सभी बातें अधूरी रह जाती है या यूं कहें कि वो बातें हो ही नहीं पाती, जो आप सोच कर आए थे। इसलिए अगर आप अपने अज़ीज़ से मिलने जा रहे हैं तो इस बात का ज़रूर ख़्याल रखें कि अगर आपके प्रियतमा या महबूब के साथ उनका कोई दोस्त भी आ गया तो फिर होगा क्या, क्या पता क्या खबर इस बात का ध्यान रखें।
5 वर्ष पहले
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Manoj Kumar

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