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प्रधानी चुनाव

Yuvraj Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गाँव की मिट्टी फिर से बोले,
        
                                                    
                            
पद की चाह में सभी डोले।
हर द्वार बैठी पद की चाहत,
फिर भी सपनों की पोल खोले।

घोषणाएँ गूंजें गली-गली,
पोस्टर-मंच सजे अनगिन,
जनता के मत का सूरज निकले,
जो सच बोले उसी के संग।

चूँकि हर बार बदलती तस्वीर,
वादों का फिर दस्तूर नया,
आशाओं का बोझ लिए चल पड़ा,
फिर गाँव में चुनाव आया।
-युवराज सिंह 
एक वर्ष पहले
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