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मर्द मांगे न्याय यहाँ

Yuvraj Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वह निर्दोष है, वह असहाय हैं
        
                                                    
                            
किसी का बेटा है, किसी का भाई है
अब थक हार के जाए कहाँ
लोग हंसकर कहते मर्द मांगे न्याय यहाँ

मन के भीतर आले में
दिन में रात उजाले में
चल रहा क्या खेल हाय यहाँ
लोग हंसकर कहते मर्द मांगे न्याय यहाँ

ना पीड़ित का तर्क मिला
मिला तो केवल नर्क मिला
अंततः मर्द क्या पाएं यहाँ
लोग हंसकर कहते मर्द मांगे न्याय यहाँ

समाज की रीत बताई गई
मर्दानगी की भाषा समझाई गई
जुबान उसकी सुनी जाए कहाँ
लोग हंसकर कहते मर्द मांगे न्याय यहाँ

बात उसकी लेकर आए यहाँ
हम दो शब्द फरमाए यहाँ
वह गर्त से चिल्ला रहा
मर्द मांगे न्याय यहाँ
3 वर्ष पहले
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