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याद आया

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मयकशी का वो दौर , वो ज़माना याद आया।
        
                                                    
                            
प्यास लगी तो मुझको मयखाना याद आया।।

शहर के ये मकान, इस कदर ख़ामोश क्यूं है।
ये सोचकर, वो गांव का ठिकाना याद आया।।
-यूनुस खान
7 घंटे पहले
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