मयकशी का वो दौर , वो ज़माना याद आया।
प्यास लगी तो मुझको मयखाना याद आया।।
शहर के ये मकान, इस कदर ख़ामोश क्यूं है।
ये सोचकर, वो गांव का ठिकाना याद आया।।
-यूनुस खान
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