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ये दिलकश मंज़र फ़ानी हैं, यकीं करो

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जहां आज बज़्म है , कल वीराने होंगे।
        
                                                    
                            
अपनों के दरम्यां ही कुछ बेगाने होंगे।।

आज का सुरूर कल का खुमार होगा।
ऐसा नहीं, लोग हमेशा यूं दीवाने होंगे।।

सहरा में कहीं भी सायबान न मिलेगा।
इस शहर में कुछ प्यासे मयखाने होंगे।।

ये दिलकश मंज़र फ़ानी हैं, यकीं करो।
यहीं पे कुछ तो सुनसान ठिकाने होंगे।।
-यूनुस खान
2 महीने पहले
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