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तमाम अपना

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हां सफर में ही गुजरा है, दिन तमाम अपना।
        
                                                    
                            
ना सहर ही अपनी,ना वक्त-ए-शाम अपना।।

किसी की बेवफाई पर, यूं गिला क्या करना।
फकत सब्र कर लेना, रहा है निजाम अपना।।
-यूनुस खान
एक महीने पहले
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