विज्ञापन

तमाम अपना

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हां सफर में ही गुजरा है, दिन तमाम अपना।
        
                                                    
                            
ना सहर ही अपनी,ना वक्त-ए-शाम अपना।।

किसी की बेवफाई पर, यूं गिला क्या करना।
फकत सब्र कर लेना, रहा है निजाम अपना।।
-यूनुस खान
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

User

1 कविता

View Profile

Deepak Sharma

24 कविताएं

View Profile