हां सफर में ही गुजरा है, दिन तमाम अपना।
ना सहर ही अपनी,ना वक्त-ए-शाम अपना।।
किसी की बेवफाई पर, यूं गिला क्या करना।
फकत सब्र कर लेना, रहा है निजाम अपना।।
-यूनुस खान
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