विज्ञापन

तहरीर चिट्ठी की

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हरे कर देती है जख़्म-ए-हिज़्र,तहरीर चिट्ठी की।
        
                                                    
                            
कितने ही राज़ छुपाये है , हर लकीर चिट्ठी की।।

तेरे हाथों से गुज़र कर, मेरे अश्कों में डूब गयी।
वाकई किस कदर बुलंद है, तकदीर चिट्ठी की।।
-यूनुस खान
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

S. L.

41 कविताएं

View Profile