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सुबह-ओ-शाम

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तवील हो गया है, इंतजार सुबह-ओ-शाम का।
        
                                                    
                            
कोसों दूर है मुझसे,करार सुबह-ओ-शाम का।।

सर-ए-बज़्म जिसको, यूं कहते हो तुम रौनक।
घर-आंगन बना है,बाजार सुबह-ओ-शाम का।।
-यूनुस खान
3 महीने पहले
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