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पुकारते हैं मुझे

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कितनी शिद्दत से, ये मेरे उसूल पुकारते हैं मुझे।
        
                                                    
                            
मुसलसल दर्द-ओ-गम से रोज़ संवारते हैं मुझे।।

मेरे अपने ही , जब से गमख्वार बने गये हैं मेरे।
सुबह-ओ-शाम , हद-ए-दर्द से गुज़ारते हैं मुझे।।
-यूनुस खान
3 महीने पहले
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