कितनी शिद्दत से, ये मेरे उसूल पुकारते हैं मुझे।
मुसलसल दर्द-ओ-गम से रोज़ संवारते हैं मुझे।।
मेरे अपने ही , जब से गमख्वार बने गये हैं मेरे।
सुबह-ओ-शाम , हद-ए-दर्द से गुज़ारते हैं मुझे।।
-यूनुस खान