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खुदा करे , उदासियां रास आने लगे हमें।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सारी हदें फिर कर गयी , रूसवाई हमारी।
        
                                                    
                            
इस हकीकत से महरूम है,तन्हाई हमारी।।

हमसे , तर्क-ए-ताल्लुक़ करके जाने वाले।
महसूस होगी , तुझको भी जुदाई हमारी।।

इस तरह , यूं ज़ुल्म-ओ-सितम ढाने वाले।
तुझे वफ़ा में दिखती है , बेवफाई हमारी।।

यकीनन,कुरबत पे सवाल खड़े करती है।
ये ग़ैरों से, यूं बढ़ती हुई शनासाई हमारी।।

खुदा करे , उदासियां रास आने लगे हमें।
ऐ सन्नाटों,करो हौंसला-अफजाई हमारी।।
-यूनुस खान
8 घंटे पहले
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