नये सिरे से, बात पुरानी कौन सुनायेगा।
बीते ज़माने की कहानी कौन सुनायेगा।।
हर शख़्स मशरूफ है, अपनी दास्तां में।
हमे, सन्नाटों की वीरानी कौन सुनायेगा।।
गर साहिल की जुस्तजू है, सबको यहां।
फिर , मौज़ों की रवानी कौन सुनायेगा।।
-यूनुस खान