विज्ञापन

मंझधार

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मंझधार के किस्से, किनारों की दास्तां।
        
                                                    
                            
वो अंधेरों के मंज़र,सितारों की दास्तां।।

माह-ए-सावन, और सहरा की खुश्की।
पतझड़ के नज़ारे,ये बहारों की दास्तां।।

कौनसी फराखदिली कैसी मेहरबानी।
गूंजती रहती है, वो सहारों की दास्तां।।

ये टूटी हुई कश्ती सुना रही है हमको।
तूफ़ां की बातें और बयारों की दास्तां।।
-यूनुस खान
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3563 कविताएं

View Profile