मंझधार के किस्से, किनारों की दास्तां।
वो अंधेरों के मंज़र,सितारों की दास्तां।।
माह-ए-सावन, और सहरा की खुश्की।
पतझड़ के नज़ारे,ये बहारों की दास्तां।।
कौनसी फराखदिली कैसी मेहरबानी।
गूंजती रहती है, वो सहारों की दास्तां।।
ये टूटी हुई कश्ती सुना रही है हमको।
तूफ़ां की बातें और बयारों की दास्तां।।
-यूनुस खान