मेरा हर दर्द, हर पीर, उसे पुरानी लगती है।
इसलिए मुझे ये अयादत बेमानी लगती है।।
मैं तन्हा इन साहिलों पर यूं रुकूं कब तक।
ठहरी-ठहरी ये मौज़ों की रवानी लगती है।।
-यूनुस खान