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तेरी बज़्म उठकर, हम दीवाने क्यूं जाते

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरी बज़्म उठकर, हम दीवाने क्यूं जाते।
        
                                                    
                            
दुत्कार ना जाते , तो मयखाने क्यूं जाते।।

तमाम उम्र अश्कों से गिला रहा मुझको।
गर ये न बहते तो ग़म पहचाने क्यूं जाते।।

अंधेरों ने अक्सर, बड़े सवाल खड़े किए।
चिराग रोशन होते तो परवाने क्यूं जाते।।

वो देखके भी दरकिनार कर देता है हमें।
ये ना होता तो एतराज जताने क्यूं जाते।।
-यूनुस खान
2 महीने पहले
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