विज्ञापन

ख़ामोशियों के मंज़र,रहेंगे कब तक।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वस्ल की भी,कोई रात होनी चाहिए।
        
                                                    
                            
अब सहरा में, बरसात होनी चाहिए।।

ख़ामोशियों के मंज़र,रहेंगे कब तक।
कुछ गुफ्तगू-ओ-बात, होनी चाहिए।।

क्या कुछ सही है, राह-ए-उल्फत में।
ये भी तो, तहकीकात होनी चाहिए।।
-यूनुस खान
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Sanjai kumar

103 कविताएं

View Profile