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करीब हूं जिसके

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं करीब हूं जिसके, मुझे दूर समझता है।
        
                                                    
                            
हर शाम ना मिलूं तो,मगरूर समझता है।।

आइने की साफगोई , पसंद नहीं उसको।
मगर लंतरानी को वो, जरूर समझता है।।

अपनों पर शायद एतबार नहीं है उसको।
ग़ैरों को, मगर जन्नत की हूर समझता है।।
-यूनुस खान
17 घंटे पहले
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