मैं करीब हूं जिसके, मुझे दूर समझता है।
हर शाम ना मिलूं तो,मगरूर समझता है।।
आइने की साफगोई , पसंद नहीं उसको।
मगर लंतरानी को वो, जरूर समझता है।।
अपनों पर शायद एतबार नहीं है उसको।
ग़ैरों को, मगर जन्नत की हूर समझता है।।
-यूनुस खान
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