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इस बहाने

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस बहाने , सितम ढा रहे हैं लोग।
        
                                                    
                            
अयादत को मेरी , आ रहे हैं लोग।।

जब से ये मातम का दौर आया है।
बेबस ही मुझको , भा रहे हैं लोग।।

अगरचे ख़ामोशी पसंद है मुझको।
मगर,ग़म के नगमें गा रहे हैं लोग।।

मुद्दतों बाद, अब भूला हूं मैं जिन्हें।
वही मंजर याद दिला रहे हैं लोग।।

ता-हद-ए-निगाह, अंधेरा देखकर।
दिन में , चिराग जला रहे हैं लोग।।
-यूनुस खान
2 महीने पहले
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