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देखकर

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर सिम्त, काले बादल छाते देखकर।
        
                                                    
                            
छत याद आयी,बरसती रातें देखकर।।

राब्ता फिर से कायम हो, मुश्किल है।
ये ही लगता है, उसकी बातें देखकर।।
-यूनुस खान
एक महीने पहले
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