हर सिम्त, काले बादल छाते देखकर।
छत याद आयी,बरसती रातें देखकर।।
राब्ता फिर से कायम हो, मुश्किल है।
ये ही लगता है, उसकी बातें देखकर।।
-यूनुस खान
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