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हे नारी तू मौसी मां भी तो है

Yavan Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हे नारी, क्या तू भूल गई? मौसी भी तू होती है,
        
                                                    
                            
संस्कारों की मूरत बन, तू मिसाल होती है।

तू यशोदा बन, कृष्ण को गोद में पाल,
माँ की ममता दे, संस्कारों की ढाल।

दुनिया जो भी कहे, तू धर्म निभा,
मौसी बन के, स्नेह का दीप जला।

पराई लगे दुनिया? कोई बात नहीं,
तू अपना लें बेटे को, ये बात सही।

जब बात हो संस्कार की, तू आगे आ,
तन ठक कर चल, अपनी गरिमा दिखा।

कलयुग की नारी है, फिर भी गौतमी बन,
ज्ञान दे बेटे को, और बौद्धिक धन।

मौसी बन, घर-घर में उजियारा फैला,
हर बेटे को तू गुरुकुल जैसा ज्ञान दिला।

तू ही तो है जो भारत की मां बनती है,
तेरी ममता से ही संस्कृति चलती है।

अपने धर्म की रक्षा कर, पद्मावती सी बन,
शौर्य भी दिखा, पर नारी धर्म न गंवा।

गैर मर्द को हाथ लगाने की इजाज़त ना दे,
तू एक चट्टान है, तू खुद में रहे।

परिवार संभाल, पर खुद को मत भूल,
तुझमें है वो आग जो बना दे ये धूल।

अब वक्त है मौसी बनकर मिसाल बनने का,
भारत को फिर से विश्वगुरु करने का! 

हमें गर्व इस नारी सम्मान करना है,
हर वर्ष 2 मार्च को मौसी मां दिवस मनाना है।।


 
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