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हिन्दी शायरी

Yashu Jaan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमें जंग में देख मौत घबराती है ,
        
                                                    
                            
हम बोलते नहीं हमारी तलवार ही बताती है ,
सुनो बुज़दिलों और ना आता है कुछ तुम्हें ,
सिर्फ़ महफ़िलों में जाकर बकवास करनी आती है

चाहे दिन को समझना चाहे रात को समझना ,
मेरी लिखी और कही हर एक बात को समझना ,
इंसान के लिए कोई काम मुश्किल हो सकता ,
इतना भी छोटा मत अपनी औकात को समझना

मेरे सोने और उसके प्यार से सुलाने में बहुत फर्क़ है ,
किसी को भूलने ख़ुद को भूल जाने में बहुत फर्क़ है ,
फर्क़ था यशु उनके दिमाग और मेरे दिल से सोचने में ,
अब उनके महल और मेरे झोंपड़ी खाने में बहुत फर्क़ है


मैं मस्त रहता हूँ अपनी ही दुनियां में ,
औरों की तरफ़ झाँकना आदत नहीं है मेरी

क्यूँ मुझपर लग रहे हैं यशु इल्ज़ाम पे इल्ज़ाम,
मुझे छोड़ने का फैसला तो उसने किया था

इतना मत प्यार कर मुझे जान से भी ज्यादा ,
दिक्कत होगी तुझे मुझको भूल पाने में

जोश - ए - जवानी है ,
दिमाग़ भरा शतरंज की चालों से ,
तूफानों की औकात अब हम बताएंगे


मेरे प्यार की कीमत कोई लगा ना सकता ,
बिक ही गया तो समझा जायेगा सट्टा ,
यशु कोई तो कीमत होगी तेरे प्यार की ,
मैंने कहा मैं जान भी हूँ दे सकता

ये तो इश्क़ नहीं है ' जान '
कोई बीमारी हो सकती है ,
जिसमें भूख नहीं लगती ,
जिसमें प्यास नहीं लगती





मेरा नाम है आशिक गमों वाला ,
मैं इश्क़ की गली में रहता हूँ ,
कुछ खास नहीं जिसके पल्ले में ,
तू किसी से पूछ मोहल्ले में ,
अव्वल दर्जे का शुदाई है ,
जिसकी किस्मत में जुदाई है ,
जो यार - यार बस कहता है ,
किस झोंपड़ी में वो रहता है ,
वो कहेगा इश्क़ की गली में है ,
मैं पूरा पता बताता हूँ ,
आगे जाकर एक मौत आएगी ,
उसके दाएं से गुज़र जाना ,
वहाँ एक दुकान है दर्दों की ,
पर भूल के मत उधर जाना ,
वहाँ पास में ही मैख़ाना है ,
जहाँ उसका आना - जाना है ,
जो यशु इश्क़ के नशे में धुत होगा ,
तू समझना वही दीवाना है



ख़ुद मेहनत कर और कुछ कर जाने की कोशिश कर
मेहनत नहीं होती तुझसे तो मर जाने की कोशिश कर



हुसन की बिजलियां आकर गई लौट हैं,
आफ़तों से खेलना ये मेरा भी शौक है ,
आना है तो शतेआम आ मैदान ए इश्क़ में ,
तेरा परदे में रहना आशिकों की मौत है,


बहुत दिन हो गए उनका दीदार नहीं हुआ,
वो ठीक हों ख़ुदा ऐसी तुझसे है दुआ,
उसके हुसन को देख परियां भी जलती हैं,
कहीं तू भी उसके ऊपर हो बेईमान ना हुआ



हमारी उमर का तकाज़ा तुम लगाओगे कैसे ,
दिखने में हैं जवान,
हरकतें भी वैसी हैं



फ़नाह हो गया हूँ तेरी मुहब्बत में मैं ' जान',
मौत भी अब तुझसे मुझे जुदा ना कर पाएगी



मेरी जान के रखवाले अब मुझे ग़म मत देना,
इश्क़ करवाकर मुझसे घुटने मेरा दम मत देना,
देने हैं तो इतने दे सह ना सकूँ और मर जाऊँ,
बर्दाश्त कर तड़पता रहूँ इतने कम मत देना



किसी ने शिकायत की मेरी कि मैं इश्क़ में पड़ गया ,
मेरे मालिक ने कल मुझे नौकरी से दिया निकाल



अपने हौंसले को मुश्किलों से कभी ना डरने देना,
रखना कदम सम्भल - सम्भल कर कुछ कर गुज़रने देना,
ख़ुद को भूल जाना मेहनत करते - करते हुए यशु जान,
मगर कभी भी तुम अपने सपनों को ना मरने देना







आंगन में मेरे धुआं सा उठा है ,
वक़्त के आग़ोश में क्या - क्या छुपा है ,
कुछ दिनों से दिल मस्त है अपने आप में ,
मेरी ज़िन्दगी में जैसे कुछ नया सा हुआ है



जानलेवा इश्क़ है आशिक़ सब जानते हैं,
मगर पतंगे की फिटरत है आग में झुलस जाना



जो करना है कर लोगों की परवाह के इलावा,
लोग तो ये भी कहते हैं पढ़ने में क्या रखा है



तू जिस पत्थर को भगवान् मान रहा है ,
उसके अंदर कोई है बसी जान मान रहा है ,
सुनता जो दुःख दर्द की दास्तां है तेरी ,
वो पत्थर भगवान् नहीं सिर्फ आस्था है तेरी



अल्लाह - अल्लाह कर रहा अल्लाह से आगे भी बढ़,
कायनात बनाई जिस अल्लाह ने,
उसकी करीगिरी से डर,
तुझे लगता अगर कोई अल्लाह है,
उसकी बातों पे अमल तो कर,
उसने तो किया कोई भेद नहीं,
तू जात का बन गया जादूगर,
है लहू तो सबका लाल रंग का,
क्यूँ फिरे भटकता इधर उधर



मन्नत मांगे हाथ फैलाए मेहनत जो नहीं कर सकता,
ईंटें पत्थर जो पूजे तेरा बन्दा नहीं हो सकता



इस मोबाईल ने बड़ों - बड़ों के खाने ख़राब कर दिए ,
दुख आ गए खुशियों के अफ़साने ख़राब कर दिए ,
तुम सिर्फ़ बच्चों की बात करते हो ,
इस मोबाइल ने ज़माने के ज़माने ख़राब कर दिए



हाथों से लड़ता - लड़ता कोई हथियार ले आए ,
मैं किसी के फटे में टांग नहीं अड़ाता


मुहब्बत जिंदगी से ना रहे ,
मौत महसूस ना हो,
ऐसा बन कोई वक़्त तेरे लिए मनहूस ना हो



हम गुम नहीं हुए इश्क़ की चार दीवारी में,
उसे हम कैद कर लाए हैं अपनी इश्क़ ख़ुमारी में



किसी चीज़ को पाने के लिए कुछ हद तक कष्टों को ढोना पड़ता है,
जैसे मोमबत्ती को रौशनी देने के लिए अपना अस्तित्व खोना पड़ता है



दिल में एक रस्ता है रस्ते में एक घर है ,
घर में कोई रहता है जो मेरा दिलबर है ,
उस घर में वो किसी को घुसने नहीं देता ,
मुझे उससे छीन ले न कोई उसको ये डर है



हर मंदिर , मस्ज़िद में ब्यान देने को तैयार थे,
तेरे बेनाम रिश्ते को नाम देने को तैयार थे,
तूने ही बेवफाई की मुझे छोड़ जो दिया ,
हम तेरे लिए जान देने को तैयार थे



कोई और हुक्म है कहने को देर मत कर ,
इंसान को बदलना मेरे बस की बात नहीं



पता नहीं क्यूं उनकी तरफ़ खींचा चला जाता हूँ ,
होश कर नहीं रहती मुझे मैं लौटकर जब आता हूँ ,
ये भी एक करिश्मा है यशु जान आने के बाद ,
अपने आपको घर नहीं उनकी आग़ोश में पता हूँ


यशु जान  


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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