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बहुत ख़याल आते मन में

yash kushwaha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुत ख़याल आते मन में,
        
                                                    
                            
जिन्हें कोरे पन्नों में संजोता हूँ।

फिर उन्हें निखार कर
नई किताब बनाऊँगा।
उस किताब को मैं
दुनिया को थमा दूँगा।

मुझको डर नहीं किसी बात का,
कोई पढ़कर क्या सोचेगा।
जिसे जो सोचना होगा, सोचे,
जितना चाहे उतना सोचे।
उन्हें मैं क्यों रोकूँगा।

"किताब मेरी, शब्द मेरे,
पर मन तो उनका अपना होगा।
अगर दिल से पढ़ेंगे तो
हर एक शब्द उनका अपना होगा।"
— यश कुमार कुशवाहा
3 महीने पहले
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