विज्ञापन

वो मुखर्जी नगर की लड़की...

Yadav Mahi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो मुखर्जी नगर की लड़की आज भी ख्वाबों में आती हैं,
        
                                                    
                            
उसका याद आते ही दिल में एक टीस सी छा जाती हैं,
वो गोल- मटोल सा चेहरा क्या मस्ती में चलती थी,
वो मेरे ही साथ GTB नगर की कोचिंग में पढ़ती थी,
उसको देख लेने भर से आँखों में ठंडक रहती थी,
लगता था कि उसके इशारों पर वो शहर चलता था,
वो जब करवट बदलती थी तो मौसम भी बदलता था,
उसकी साँस की खुशबू से पूरा मुखर्जी नगर महकता था,
तन काँप गया था उस दिन जब हाथों को पकड़ी थी,
फिर धीरे-धीरे ही सही वो अपने बाहों में जकड़ी थी,
वो बोलती तो लगता था कि बातों से फूल झरते हो,
उसको देखकर ही आशिक अपने रंग बदलते हो,
मुझे याद हैं जब कोचिंग के बाहर पहली बार मिली थी,
थोड़ी भयभीत थी पर मन ही मन खूब खिली थी,
आज मैं भी हूँ वो भी हैं पर रास्ते अलग हैं,
वो जो ख्वाब देखे थे वो वास्ते अलग हैं,
मुखर्जीनगर की इस भीड़ में वो खो सी गई,
जो लड़की सिर्फ मेरी थी किसी की हो सी गई,
अब मन बिल्कुल नहीं लगता मुखर्जीनगर में,
इसलिए लौट आएं है वापस हम अपने घर में||
~माही
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

437 कविताएं

View Profile

malti gupta

16 कविताएं

View Profile

Shivendra Mishra

4 कविताएं

View Profile