पैसे का जन्म दाता इन्सान है ख़ुदा नहीं है हिफाज़त भी ख़ुद करना है
इच्छा को काबू में रखना ख़ुद का काम है यह ख़ुदा का काम नहीं है
धन से घर बना सकते हैं दिल किसी का दुखा कर प्राप्ति अच्छा नहीं
प्राप्ति जब समझा जायेगा के मौत के बाद साथ जाए समझना होगा
जिसमें न समझ न अहसास वो ढांचा को दाग़ धरती समझता है वसी
बुद्धिमान वह नहीं जो निजी मुफ़ाद केलिए इंसान का क़त्ल आम करे