ना चांद सितारें
बस तुम ही सब से प्यारे
ये हमे क्या हुआ?
ये हवाएं भी मुझसे लिपटती क्यूं है
बातें तेरी मुझ से करती क्यूं है
ये प्यारा सा मौसम
लगे पास हो तुम
आ ही गया जिंदगी को करार।
जाने क्या बात है तेरी इस हँसी में,
कि बनती ही जाऊं बावरी सी मैं,
वो रूठी सी राहें
मिले जो जो तुमसे निगाहे,
जिंदगी भी लगने लगी आफताब ।
न चांद सितारे , बस तुम सबसे प्यारे
ये हमे क्या हुआ?
तुम खास हो जिंदगी मुझ से कहती
तुम्हे पाने की हसरत क्यूं मचलती
कभी तेरा इशारा
कभी तू ने पुकारा
मिल ही गई जीने कि वजह।
न चांद सितारे , बस तुम सबसे प्यारे
ये हमे क्या हुआ....?
डॉ नीरू जैन