सर्द ठिठुरते मन में
जब तुम
मेरी बातों में
कुनकुनी
गरमाहट ढूंढते हो, और
मैं हवा में
तुम्हारी मौजूदगी
महसूस करती हूँ।
मेरा प्रेम जो
मेरी आँखों में था
लब्जो में बयां न हो सका,
तुमने
बिना कहे
समझ लिया।
फिर भी तुम्हे
मेरी हामी के दस्खत चाहिए,
जन्मों के साथ का वादा
और,
उमर भर हाथ थाम
संग चलने की अनुमति चाहिए,
मेरी भी चाहत है यहीं कि
तुम रंग बनकर
बिखरो मुझमें,
मैं ख़ुशबू बनकर
तुम्हारे
हर एहसास में
बसती रहूँ।
और
मैं तुम्हारी नज़रों में
हर पल
निखरती रहूँ।
- नीरू जैन