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गुलाल तेरे गालों पे

Voice N

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समझ लेना कि मैं हूॅं तेरे आसपास.....
        
                                                    
                            
मुस्कान बेवजह
तेरे होठों पे चली आए,
तो समझ लेना कि ये मैं हूॅं,
गुलाल उड़ उड़ के
तेरे गालों पे बिखर जाए
तो समझ लेना कि ये मैं हूं....

तल्खियों भरी शाम में,
लब तेरे अचानक ,
कोई प्रेम तराना गुनगुनाए,
तो समझ लेना कि ये मैं हूॅं.....

यादें खींच ले जाए तुझे,
पुरानी चिट्ठियों तक,
महकने लगे जो इनके अल्फाज़
तो समझ लेना कि ये मैं हूॅं.....

वजह जब ढूंढ रहे हो,
बेवजह खुश होने की,
झांकने लगे किताबों से जो सूखे गुलाब
तो समझ लेना कि ये मैं हूॅं....

मूंदते ही आंखें,
सकूं पसर जाए आसपास,
नाचने लगे जो कदम तेरे बिन ताल,
समझ लेना कि ये मैं हूॅं......-डॉ नीरू जैन
5 महीने पहले
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